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4 अप्रैल 2018

आइने की फितरत से नफरत करके क्या होगा

आईने की फितरत से नफरत करके क्या होगा 
किरदार गर नहीं बदलोगे किस्सा कैसे नया होगा 
हर बार आईना देखोगे धब्बा वही लगा होगा 


आईने लाख बदलो सच बदल नहीं सकते 
जो गुनाह किया तुमने उनका फल बदल नहीं सकते 

आज आईने से नफरत है खुद से नफरत हो जाएगी एक दिन
सारे पापों के धब्बे जब चेहरे पर निकलेंगे गिन-गिन

छुप लो जब तक छुप सकते हो गुमनामी के अंधेरे में
सोच लो तब क्या होगा जब दुनिया देखेगी सवेरे में

एक सलाह है तुमको तुम्हारा सब कुछ लुट जाने से पहले
चले जाओ ये दुनिया छोड़कर अंधेरा छट जाने से पहले

तुम्हारे इसी चेहरे से मोहब्बत थी मुझे एक दिन
मैं भी नहीं देखना चाहता तुम्हारा यह रुप
संजो कर रखना चाहता हूं पुरानी यादें हसीन


  

1 टिप्पणी:

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Gautam Kumar

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